मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान राजस्थान सरकार

मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान राजस्थान सरकार

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मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान राजस्थान सरकार द्वारा चलाया गया है। इस अभियान के तहत राजस्थान सरकार राज्य में जल संकट को दूर करना चाहती है तथा सरकार द्वारा इस अभियान के लिए एक नीतिगत ढांचा भी तैयार किया गया है, जिससे राज्य से जल संकट को दूर किया जाएगा। क्या है मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान? आइए जानते हैं विस्तार से इस आर्टिकल के माध्यम से।

मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान क्या है?

राजस्थान मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान – जैसा कि आप सभी जानते हैं जल सभी के जीवन के लिए कितना महत्वपूर्ण है बिना पानी के किसी भी प्राणी और पेड़ पौधों के लिए जीवित रहना नामुमकिन है। तो एक ऐसे क्षेत्र की कल्पना कीजिए जहां सामान्य तापमान अधिक हो और पानी की भी कमी हो। साफ शब्दों में कहा जाए तो वहां रहने वाले इंसान और जानवर दोनों ही बहुत मुश्किल से जीते हैं।

ऐसा ही एक राज्य भारत में है राजस्थान जोकि अधिकतर रेगिस्तान है तथा वहां तापमान भी अधिक है और वर्षा भी कम होती है। जिस वजह से वहां जल संकट है। इसी जल संकट से निबटने के लिए राजस्थान सरकार ने मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान की शुरुआत की है।

राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 343 लाख हेक्टेयर है। इसमें से केवल 168 लाख हेक्टेयर भूमि ही कृषि योग्य भूमि है। राज्य के पास बंजर भूमि के अंतर्गत 101 लाख हेक्टेयर भूमि आती है। अरावली पर्वतमाला दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व तक फैली हुई है जो राज्य को दो भागों में विभाजित करती है।

सबसे बड़ा भाग थार मरुस्थल है जिसका क्षेत्रफल राज्य का लगभग 60% है। शुष्क और गर्म पश्चिम भाग में वार्षिक वर्षा 100 मिमी और दक्षिण-पूर्व भाग में 900 मिमी है। आम तौर पर पांच वर्षों में से, 3 वर्ष सूखा प्रभावित ही होते हैं अर्थात असामयिक, अनिश्चित और कम वर्षा, यह अस्थिर फसल उत्पादन के लिए जिम्मेदार है।

कम समय में अधिक तीव्रता होने वाली वर्षा के कारण वर्षा का बड़ा भाग व्यर्थ चला जाता है, बह जाता है। वाटरशेड क्षेत्र में जल संचयन संरचनाओं की कमी के कारण बहते वर्षा जल का सही उपयोग नहीं हो पाता है जिसके परिणामस्वरूप कुओं के जल स्तर में लगातार गिरावट आती है।

राजस्थान में सामान्यत: वर्षा की अवधि अधिक होती है जिसका फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। किसान के फसल उत्पादन में गिरावट और कृषि योग्य भूमि को बंजर भूमि में बदलने के कारण, ईंधन, चारा, दूध की कमी होती है, जिसके परिणामस्वरूप उनकी कमजोर सामाजिक-आर्थिक स्थिति होती है।

इस स्थिति का मुख्य कारण पानी की कमी है। वाटरशेड विभाग यदि अन्य विभागों के समन्वय से कार्य-योजना तैयार करने का कार्य करता है तो वह निश्चित रूप से पेयजल एवं सुनिश्चित सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने में सक्षम होगा।

चूंकि राज्य में 75 प्रतिशत ग्रामीण आबादी है जो अपनी आजीविका के लिए कृषि और पशुधन पर निर्भर है, इसलिए राज्य की इन स्थितियों के को ध्यान में रखते हुए उनके लिए मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान की आवश्यकता है। राज्य की जल संकट से निपटने के लिए चार प्रकार के पानी का सदुपयोग करना बहुत जरूरी है – वर्षा जल, बहते हुए जल, भूमिगत जल और मिट्टी की नमी।

क्योंकि राजस्थान के ज्यादातर भाग जिनमें पश्चिमी राजस्थान शामिल है वर्षा अनिश्चित तरीके से होती है यानि वर्षा होने का ना कोई निश्चित समय है ना कोई निश्चित मात्रा है और देखा जाए तो यहां पर वर्षा काफी कम मात्रा में ही होती है इसलिए मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान यहां की स्थिति के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के उद्देश्य

  • मौजूदा दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विभागों की योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण एवं जल संचयन संबंधी गतिविधियों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।
  • ग्रामीणों एवं लाभार्थियों को प्रेरित कर जनभागीदारी से कार्यों का ठीक ढंग से क्रियान्वयन।
  • ग्राम सभा में ग्राम स्तर पर पेयजल, सिंचाई, पशुधन एवं अन्य व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए जल के उपयोग का निर्धारण कर तथा विभिन्न संसाधनों से उपलब्ध जल को ध्यान में रखते हुए जल बजट तैयार कर तदनुसार अभियान के तहत कार्यों की पहचान की जायेगी तथा निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की जायेगी।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में जलसंचय (वर्षा जल, भूजल, भूमिगत जल और मिट्टी की नमी में) के उपाए, उपलब्ध जल संचयन संरचनाओं का उचित उपयोग, गैर-कार्यात्मक जल संचयन और संरचनाओं का नवीनीकरण और नए जल संचय इकाई का निर्माण। 
  • वाटरशेड/क्लस्टर/इंडेक्स को प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के लिए एक इकाई के रूप में रखते हुए वन, भूमि, जल और जीव-जंतुओं का विकास।
  • गांव को पानी के  लिए आत्मनिर्भर बनाकर पेयजल का स्थाई समाधान करना।
  • जल संचयन एवं संरक्षण के माध्यम से सिंचित क्षेत्र को बढ़ाना।

मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के लिए फंडवाटरशेड कर

राजस्थान के गांवों को सूखे से बचाने के लिए और जल संचयन एवं संरक्षण कार्यों को क्रियान्वित करने के लिए एक वाटरशेड कर लिया जायेगा जो कि राज्य के विभागों, गैर सरकारी संगठनों, कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर), जनभागीदारी, अनिवासी ग्रामीण क्लब (एनआरवी क्लब) आदि से जल बजट लिया जायेगा जिसके तहत उपलब्ध धनराशि से जल संकट का स्थाई समाधान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान की रुपरेखा

प्रथम वर्ष में प्राथमिकता के आधार पर लगभग 3000 गांवों की पहचान की जाएगी और आने वाले 3 वर्षों में लगभग 6000 गांवों को हर साल शामिल कर मिशन से राज्य के 21000 गांव लाभान्वित होंगे और उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर स्थायी समाधान प्राप्त किया जाएगा। पानी की शर्तें। शेष गांवों में चरणबद्ध तरीके से प्राथमिकता सूची के अनुसार कार्यों को क्रियान्वित किया जायेगा।

मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के लिए संस्थागत व्यवस्था

  • राज्य ग्रामीण जल संरक्षण मिशन
  • राज्य स्तरीय निर्देशन समिति
  • राज्य स्तरीय कार्य समूह
  • जिला स्तरीय निगरानी समिति
  • जिला स्तरीय समिति
  • ब्लॉक स्तरीय समिति
  • ग्राम स्तरीय समिति – कार्य योजना तैयार करेगी

मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के लिए विभागीय स्वीकृति

जिला कार्य योजना की स्वीकृति

ग्राम सभा द्वारा स्वीकृत कार्यों की प्राथमिकता पर जिला स्तरीय समिति से अनुमोदन प्राप्त कर जिला कलेक्टर द्वारा जिला मिशन योजना जारी किया जायेगा।

प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति

“मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान” के तहत प्राप्त राशि की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जिला कलेक्टर या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी द्वारा जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति की स्वीकृति के बाद जारी की जायेगी। विभागीय कार्यों की स्वीकृति मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुसार सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी की जायेगी। विस्तृत निर्देश अलग से जारी किया जाएगा।

तकनीकी स्वीकृति

तकनीकी स्वीकृति संबंधित विभाग के सक्षम तकनीकी अधिकारी द्वारा जारी की जायेगी। तकनीकी स्वीकृतियों का पृथक अभिलेख एवं रजिस्टर होगा।

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